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  ✧ प्रारम्भिक प्रश्न ✧ (पाठक के लिए आह्वान) क्या तुमने कभी रुककर पूछा है— आत्मा और परमात्मा कौन हैं? तुम कौन हो, क्या हो, और क्यों ...

✧ प्रारम्भिक प्रश्न ✧

 

✧ प्रारम्भिक प्रश्न ✧

(पाठक के लिए आह्वान)


क्या तुमने कभी रुककर पूछा है—

  1. आत्मा और परमात्मा कौन हैं?
  2. तुम कौन हो, क्या हो, और क्यों हो?
  3. क्या शास्त्रों में लिखा प्रेम, समाधि, आनंद आज भी संभव है?
  4. क्या आज के संत वास्तव में जानते हैं?
  5. जीवन का सत्य क्या है—और असत्य क्या है?

  1. क्या धनवान सच में सुखी है?
  2. क्या भगवान आज भी मिल सकता है?
  3. क्या धर्म, साधना, विश्वास जरूरी हैं—या केवल आदत?
  4. देवी-देवता, राक्षस—क्या हैं, कहाँ हैं?
  5. पाप, पुण्य, तीर्थ—इनका अर्थ क्या है?

  1. क्या कोई तुम्हारी प्रार्थना सुनता है?
  2. सब कुछ होते हुए भी भीतर खालीपन क्यों है?
  3. तुम सुखी क्यों नहीं हो?
  4. जो तुम जी रहे हो—क्या वह सच में “तुम” हो?

  1. काम, क्रोध, मोह, अहंकार—बाधा हैं या मार्ग?
  2. त्याग, तप, नियम—जरूरी हैं या भ्रम?
  3. मंदिर और मूर्ति—आवश्यक हैं या प्रतीक?
  4. तुम जिस सुख के पीछे भाग रहे हो—वह भूख क्या है?

  1. स्त्री-पुरुष का आकर्षण—क्यों है?
  2. परिवर्तन भीतर से चाहिए या बाहर से?
  3. क्या अधूरा मन भी पूर्णता पा सकता है?
  4. क्या तुम अपने बारे में जो मानते हो—वह सत्य है?

  1. अहिंसा और हिंसा—वास्तव में क्या हैं?
  2. मोक्ष क्या है—और कैसे?
  3. तुम्हारे साधन—जरूरत हैं या गुलामी?
  4. भाग्य सच है या मन की कहानी?

  1. कर्म क्या है—और उसका फल कैसे आता है?
  2. तुम वास्तव में कौन हो?
  3. मृत्यु के बाद क्या होता है?
  4. मृत्यु से डर क्यों लगता है?

  1. तंत्र, मंत्र, ज्योतिष—सत्य हैं या भ्रम?
  2. क्या तुम्हारे पास ऐसे उत्तर हैं
    जिनके प्रश्न तुमने कभी पूछे ही नहीं?

  1. क्या तुम परम को जानते हो—
    या केवल मानते हो?

✧ अंतिम आह्वान

यदि ये प्रश्न तुम्हारे भीतर
केवल शब्द नहीं,
बल्कि बेचैनी बन गए हैं—

तो यहीं स्थान आपके किये है