अध्याय : निर्णय दो — खोज मैं करूँगा
Translate
अध्याय : निर्णय दो — खोज मैं करूँगा भाग 1 : प्रश्न (निर्णय की चुनौती) इतने सारे गुरु हुए। इतने सारे धर्म बने। इतने सारे दर्शन और शास्त्र ल...
अध्याय : निर्णय दो — खोज मैं करूँगा vedant
भाग 1 : प्रश्न (निर्णय की चुनौती)
इतने सारे गुरु हुए।
इतने सारे धर्म बने।
इतने सारे दर्शन और शास्त्र लिखे गए।
और विज्ञान ने भी हर दिशा में खोज की।
लेकिन एक बात आज भी
वैसी ही खड़ी है—
ईश्वर
न तो साबित हो पाया,
न खोजा जा सका।
यही अपने आप में
सबसे बड़ा संकेत है।
मैं यहाँ यह कहने नहीं आया
कि ईश्वर है।
मैं यह कहने भी नहीं आया
कि ईश्वर नहीं है।
मैं सिर्फ़ यह पूछने आया हूँ—
जिसे तुम ईश्वर कहते हो,
क्या वह तुमसे अलग है—
हाँ या नहीं?
बस।
इसके आगे कुछ नहीं।
अगर तुम कहते हो—
हाँ, वह हमसे अलग है,
तो फिर साफ़ बोलो—
वह कहीं है
किसी दूरी में है
किसी दिशा में है
मुझसे यह मत बताओ
कि कौन-सी दिशा,
कितनी दूरी,
कहाँ।
खोजना मेरा काम है।
अगर तुम कहते हो—
उसका कोई रूप है,
तो कैसा रूप यह मत बताओ।
रूप खोजना मेरा काम है।
अगर तुम कहते हो—
उसका कोई रंग है,
तो कौन-सा रंग यह मत समझाओ।
उसे सिद्ध करना मेरा काम है।
अगर तुम कहते हो—
उसकी आवाज़ है,
तो कैसी आवाज़ यह मत बताओ।
उसे खोजना मेरा काम है।
मुझसे कथाएँ मत कहो।
मुझसे विश्वास मत दो।
मुझसे अनुभव मत सुनाओ।
तुम सिर्फ़ यह तय करो—
“है” या “नहीं है।”
अगर तुम कहते हो—
ईश्वर नहीं है,
तो भी डरो मत।
मैं यह भी देखूँगा
कि “नहीं है” कहना
कहाँ तक सही है
और कहाँ से टूटता है।
लेकिन यह मत करो—
कभी “है” कह देना
कभी “नहीं” कह देना
और बीच में धुंध फैला देना
क्योंकि धुंध में
न खोज होती है,
न विज्ञान चलता है,
न दर्शन टिकता है।
मैं न आस्तिक हूँ।
न नास्तिक।
मैं खोजी हूँ।
और खोजी को
आस्था नहीं चाहिए—
स्पष्ट निर्णय चाहिए।
इस तरह
तीन ही स्थितियाँ हैं—
निर्णय “हाँ”
→ मेरा काम
ईश्वर की खोज और सिद्ध करना
निर्णय “नहीं”
→ मेरा ही काम
ईश्वर की खोज और सिद्ध करना
कोई निर्णय नहीं
→ मेरा काम
तुम्हारे अस्तित्व और सोच को सिद्ध करना
भाग 2 : उत्तर (निष्कर्ष / उद्घाटन)
तुम तीनों जगह नग्न हो।
कहीं पर भी खरे नहीं उतरते।
इसीलिए—
आज तक
सारे धर्म,
सारे गुरु,
सारे दर्शन,
सारे शास्त्र—
ईश्वर के संबंध में
एक भी विज्ञानिक नहीं हैं।
वे सिर्फ़
भ्रम की अवस्था हैं।
यह भ्रम
मनुष्य को जीवन से दूर रखता है।
क्योंकि—............. उत्तर तुम ख़ुद खोजों।
वेदान्त 2.0 : जीवन —
यह साहित्य जीवन के पक्ष में दिया गया एक सीधा वक्तव्य है।
यह किसी धर्म, दर्शन, अध्यात्म, साधना या बौद्धिक प्रणाली से संबद्ध नहीं है।
यह समझाने, सिखाने, दिशा देने या किसी निष्कर्ष तक पहुँचाने के लिए नहीं लिखा गया है।
यह किसी परिवर्तन, उपलब्धि, शांति या सिद्धि का दावा नहीं करता।
यह केवल पढ़े जाने के लिए है—
ताकि जीवन को बिना व्याख्या के देखा जा सके।
उपलब्धता:
About author: vedanta 2.0 Life
Cress arugula peanut tigernut wattle seed kombu parsnip. Lotus root mung bean arugula tigernut horseradish endive yarrow gourd. Radicchio cress avocado garlic quandong collard greens.