यह ग्रंथ किसी गुरु, नाम, चेहरे या भगवान पर आधारित नहीं—
बल्कि उन संकेतों पर आधारित है जो सीधे
अस्तित्व, प्रकृति और स्वयं के अनुभव की ओर ले जाते हैं।
यहाँ शब्द अंतिम नहीं हैं— वे केवल दिशा हैं।
और दिशा का उद्देश्य है— तुम्हें तुम्हारे भीतर ले जाना।
यदि तुमने कभी महसूस किया है कि
ज्ञान बहुत है, पर बोध नहीं…
श्रद्धा बहुत है, पर सत्य नहीं…
✍🏻 — 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲
