यह ग्रंथ किसी गुरु
, नाम, चेहरे या भगवान पर आधारित नहीं—
बल्कि उन संकेतों पर आधारित है जो सीधे
अस्तित्व, प्रकृति और स्वयं के अनुभव की ओर ले जाते हैं।
यहाँ शब्द अंतिम नहीं हैं— वे केवल दिशा हैं।
और दिशा का उद्देश्य है— तुम्हें तुम्हारे भीतर ले जाना।
यदि तुमने कभी महसूस किया है कि
ज्ञान बहुत है, पर बोध नहीं…
श्रद्धा बहुत है, पर सत्य नहीं…
तो यह ग्रंथ तुम्हारे लिए है।
यह तुम्हें सिखाएगा नहीं— बल्कि तुम्हारे भीतर प्रश्न जगाएगा।
क्योंकि जहाँ प्रश्न जीवित हैं, वहीं सत्य का जन्म होता है।
शब्द सत्य नहीं — केवल संकेत हैं ✧
जैसे उंगली चाँद की तरफ उठी—
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