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  वेदांत 2.0 कोई कहानी नहीं, धर्म , गुरु नहीं केवल समझ सूत्र है। यह अध्यात्मक विज्ञान को आधुनिक विज्ञान के तीन स्तर पर रखता है। 1. गणित — 0 ...

वेदांत 2.0 कोई कहानी नहीं, धर्म , गुरु नहीं केवल समझ सूत्र है

 वेदांत 2.0 कोई कहानी नहीं, धर्म , गुरु नहीं केवल समझ सूत्र है।

यह अध्यात्मक विज्ञान को आधुनिक विज्ञान के तीन स्तर पर रखता है।
1. गणित — 0 से 3 गुण, पंच तत्व, फिर धरती, ग्रह, जीव, इंसान तक। 2. भौतिक — क्वांटम, बिजली, परमाणु के ऋण-धन आवेश को द्वैत-अद्वैत से जोड़ना। स्त्री-पुरुष का Bio-Electric Polarity समझाना। 3. डायग्राम — बिना शास्त्र की कहानी के, सीधा इमेज से दिखाना कि 0 से द्वैत कैसे बनता है, कहाँ अद्वैत लौटता है, और अंत में फिर 0 ही बचता है।
वेदांत 2.0 यही संगम है: विज्ञान के गुण-सूत्र को वेदांत की भाषा देना। ब्रह्मा की पुत्री कौन थी, मनु के पुत्र कौन थे — ये सवाल नहीं। सवाल ये है: ब्रह्मांड में स्त्री-पुरुष की स्थिति क्या है? दुःख, चिंता, भय का विज्ञान क्या है? उसका समाधान क्या है?
आज विज्ञान, धर्म, राजनीति — तीनों को एक चुनौती है: "तुम कहाँ खड़े हो?"
आध्यात्म को कोई डिग्री नहीं देता, क्योंकि देने वाला खुद नीचे खड़ा है। घटना को पूजना धर्म नहीं। घटना सबके भीतर संभव है — उसे समझना विज्ञान है।
जब संसार के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में विज्ञान के आधार पर प्रश्न जन्मेंगे, तब विज्ञान और आध्यात्म दोनों को आमने-सामने होना पड़ेगा। तभी विज्ञान भीतर से कबूल करेगा कि आध्यात्म अंधविश्वास नहीं, Consciousness Engineering है।
0 से निकले, 0 में खेले, 0 में लौटे — बीच का सब 'मैं' का भ्रम है। इसे समझना-होना-भोगना, बस यही तीन स्तर हैं। वेदांत 2.0 https://orcid.org/0009-0000-8083-0685 यह धर्म भीड से दूर बिन धार्मिक बन कर अपना काम करता है
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